ये ज़िंदगी एक दिन ख़त्म हो जाएगी

जीवन को सही तरह से जीने की प्रेरणा देने वाली कविता

ये ज़िन्दगी खत्म हो जाएगी

ये ज़िन्दगी ही तो हैं,
खत्म हो जाएगी;
दो पल के आंसू ही तो है,
सूख जाएंगे;

सूरज,
हाँ सूरज भी तो ढलता है ना,
और चाँद भी तो ढलकर,
फिर उगता है ना;

सागर की लहरें भी,
उछल कर,
दो पल ठहरती है ना,
हवाओं के तूफान भी,
समीर बन
गुज़रते है ना;

हार ही तो है,
हार से ही हार जाएगी,
उम्मीद ही तो है,
फिर जग जाएगी;

सोच-सोच कर,
वक्त बर्बाद न कर,
क्योंकि वक्त फिर न आएगा,
जो एक बार गुज़र गया,
तो बस अफसोस या याद बन,
वापिस आएगा;

ये ज़िन्दगी ही तो हैं,
खत्म हो जाएगी;
दो पल के आंसू ही तो है,
सुख जाएंगे।

हम जीवन में कई बार निराशा का सामना करते हैं| लेकिन हम यह भूल जाते हैं की हार भी जीवन का हिस्सा है| कभी-कभी हमें निराशा का सामना करना पड़ता है| इसको जीवन का अंत मानने के बदले हम इसे एक चुनौती के रूप में देख सकते हैं|.

दुःख को भूल कर और आंसूओ को पोंछकर हम सफलता और ख़ुशी की ओर बढ़ सकते हैं| कहीं ऐसा न हो की जीवन निकल जाए और हमारे पास सिर्फ पछतावा बच जाए| ये जीवन सीमीत समय तक ही हमें मिला है| आईये, हम सब इसका सदुपयोग करें|

Article by: विश्वा जानी

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