मज़बूत मानसिकता का निर्माण कैसे करें

अपने मन को सही दिशा दें

हम मनुष्य सामाजिक प्राणी हे। आस पास के लोगों का हम पर बहुत प्रभाव होता है । हम एक दुसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं| हर मनुष्य चाहता है के वह दुसरे से बेहतर हो। लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए की बेहतर होने की दौड़ में योग्य बनना बहुत ज़रूरी है। योग्य इंसान वही है जिसके पास शारीरिक सामर्थ्य के साथ-साथ मानसिक मज़बूती भी हो|

शारीरिक बल बढ़ाने के लिए तो कई उपाए किए जाते हैं, जैसे व्यायाम और अलग-अलग प्रकार के आहार का सेवन करना। परन्तु बहुत कम लोग चाहते हैं के वे मानसिक तौर पर भी स्वस्थ और स्थिर रहे | भले ही शरीर बलवान हो, लेकिन मजबूत मानसिकता ना हो तो बल व्यर्थ है|

खरगोश और कछुए की कहानी तो सबने ही सुनी है। खरगोश शारीरिक रूप से कछुए के मुकाबले श्रेष्ठतर था, परन्तु कछुए का दृढ़ निश्चय था जिसकी वजह से उसकी जीत हुई।

हम वही करते है जो हमारा मन कहता है | मन को अनुशासित करना इतना कठिन नहीं है जितना की सुनाई देता है। लेकिन मन को मज़बूत बनाने के लिए सबसे पहले मनुष्य को अपनी शक्तियों और कमज़ोरियों का ज्ञान होगा अति आवश्यक है। बिना इस ज्ञान के मनुष्य यह समाज ही नहीं पाएगा के कोनसा कार्य उसके लिए उचित है और कौनसा नहीं । तथा किस कार्य में उसे रूचि होगी और किस कार्य में नहीं। अर्थात अपने आप को समझना बहुत ज़रूरी है।

आत्मज्ञान प्राप्त करना असंभव नहीं है। हर व्यक्ति अगर प्रति दिन केवल १० मिनिट एकांत में बैठ कर पूरे दिन की क्रियाओं पर चिंतन करे, तो धीरे-धीरे आत्म-ज्ञान का राह खुल जाएगा। यह गतिविधि लगातार करने से हम खुद को समझ सकते हैं| स्वयं को समजने के बाद ज़रूरी है खुद पर विश्वास करना। जब हमें खुद पर भरोसा होगा, तभी हम कठिनायों का सामना कर पाएंगे।

यह सोचना गलत है की सिर्फ बहुत बड़ी सफलता प्राप्त हो, उसके बाद ही आत्म-विश्वास बढ़ेगा| छोटे-छोटे कार्य पर हम ध्यान दें। जैसे-जैसे हमें

इन कार्यों में सफलता प्राप्त होगी, वैसे-वैसे हमें स्वयं की काबिलियत पर विश्वास होगा। हर कार्य को पूर्ण आत्मविश्वास के साथ करने से हमारा हौंसला बढ़ेगा, और कार्य के पूरे हो जाने पर अपने आप को हम एक तोहफा भी दे सकते हैं|

अंतिम तरीका जिससे मनुष्य मज़बूत मानसिकता का निर्माण कर सकता है वह है प्रतिबद्धता। मज़बूत मन और प्रतिबद्धता एक हमेशा साथ होते हैं। जिस मनुष्य का मन पक्का है वह प्रतिबद्ध होता है और जो मनुष्य प्रतिबद्धता का पालन करता है वही मानसिक रूप से प्रबल बन सकता है| कोई भी कार्य हो, बड़े से बड़ा जैसे जीवनसाथी चुनना या छोटे से छोटा कार्य जैसे अगले दिन आने वाली परीक्षा के लिए पढ़ना, सभी कार्य पूरी प्रतिबद्धता के साथ किये जाने चाहिए, वरना सफलता मिलना नामुमकिन के सामान है|

जीवन में ज़्यादातर समय हमारे पास दो राहें ऐसी होती हैं - जहा एक रास्ता छोटा और आसान लगता है, हदूसरा कठिन और लम्बा। हमें ऐसा लगेगा के यही मौका है दूसरों को पीछे छोड़ने का | इन दो-राहों पर दृढ़ता से फैसला लेना आवश्यक है, और यह दृढ़ता धीरे-धीरे, नियंतर प्रयास करने से बनेगी।

सिर्फ उस इंसान का मन मज़बूत हो सकता है जो कठिनाई से ना डरे और प्रतिबद्धता के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता जाए|

Article by: अदिती नीमा

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