पीढ़ियों के बीच का फासला

माता-पिता और बच्चों के बीच की दूरी को कैसे कम करें

क्या आपको कभी ऐसा ख़याल आया है कि आपके माता-पिता आपको समझते ही नहीं? या फिर वे आपको हर बात के लिए डांटते हैं? कई बार हमारे मन में ऐसी सोच बैठ जाती है|'हमारे ज़माने में......' - इन शब्दों से शुरू होने वाली कई कहानियाँ सुनी ही होंगी, और इनमे से कई कहानियों ने आपको अचंभित भी किया होगा| कई कहानियां आपको बिलकुल पसंद नहीं आई होगी, शायद वो आपकी विचारधारा के विरुद्ध है|

कई बार माता-पिता के साथ सामान्य बात-चीत एक झगड़े में बदल जाती है| रोज़ की छोटी छोटी बातों से घर में झगड़े हो जाते हैं, जैसे, 'लेट क्यों आए?', या फिर 'यह कपडे क्यों पहने?', 'यह क्या खा रहे हो?', या 'अभी तुम बच्चे हो, हमारी बात मनो'|

यह मतभेदों का मुख्य कारण है सोच, विचार और मान्यताओं का अंतर। इस अंतर को पीढ़ी अंतराल (जेनेरशन गैप) कहते है। पीढ़ी अंतराल कई तरह से देखा जाता है, जैसे: भाषा का इस्तेमाल, तकनिकी जागरूकता, जीवन को ले कर रवैया, आदि| हर पीढ़ी के आगे बढ़ने से अलग परिस्थी पैदा होती है| पीढ़ी अंतराल के लिए हम किसी को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते| यह एक सामान्य सामाजिक परिवर्तन है |

आज-कल यह समस्या बच्चों और युवानों में काफी बढ़ गई है | उस उम्र में सबको अपनी शर्तों पर जीवन जीने की आज़ादी चाहिए | उसी तरह माता-पिता चाहते है के उनके बच्चे अच्छे से पढ़ें अपना जीवन बनाएं| इस अंतर्विरोध का नतीजा है कभी ना ख़तम होने वाली बहस |

माता पिता के साथ वैचारिक मतभेद कहाँ नहीं होते? कई बार हम ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया दे देते हैं और बात और बिगड़ जाती है । अगर हमारी प्रतिक्रिया से बात बिगड़ सकती है, तो उसी की वजह से बात संभल भी सकती है|

इस मसले का साधारण सा समाधान है संवाद (कम्युनिकेशन)। संवाद को आम भाषा में हम बात-चीत बोल सकते है| मलाला यौसफ्जई ने कहा है 'समस्याओं को हल करना और युद्ध के खिलाफ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका बात-चीत के माध्यम से हो सकता है|'

दो या ज़्यादा लोग अपने विचार, भावनाएं या जानकारी आपस में बाँटते हैं, उसे संवाद (कम्युनिकेशन) कहते हैं| जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या का हल बात करने से निकल सकता है अगर सब पक्ष इसके लिए तैयार हो तो|

माता-पिता के साथ असहमति भी बातों के द्वारा सहमति में बदली जा सकती है । यहाँ दोनों ओर से बराबर का प्रयास होना ज़रूरी है । माता-पिता को भी यह समझना आवश्यक है के उनके बच्चों का अपना एक व्यक्तित्व है । अपने बच्चों को मुसीबतों से बचाने की कोशिश में वें उन्हें अधिक बंधनो में बाँध देते हैं| माता पिता को यह भी समझाना आवश्यक हैं के वें अपने बच्चों से बहुत कुछ नया सीख सकते हैं |

इस तरह दो पीढ़ियों के बीच दूरियां भी कम होंगी और बच्चों का आत्म-विश्वास भी बढ़ेगा |

दूसरी ओर हम बच्चों और युवानो को भी यह समझने की आवश्यकता है के हमारे माता-पिता कभी हमारा बुरा नहीं चाहेंगे। कई युवाओ का यह मानना होता है के 'उनके माता पिता कभी उनकी सुनेंगे ही नहीं'| परन्तु यह सत्य नहीं है| अगर हम कोशिश करें तो हम हमारी बात उनके सामने रख सकते है । पहले प्रयास में शायद ही बात बने, लेकिन अगर प्रयास दोनों ओर से सतत हो बात ज़रूर बनेगी। और दोनों पीढ़ियों की दूरी कम होगी|

Article by: अदिती नीमा

लेखक


Comments

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Naresh Kumawat
It's amazing. Really. Mujhe es se bahut kuch sekhne ko mila hai. Thank u maam

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