चुनौतियो के लिए तैयार रहे

जीवन में अचानक से आने वाली कठिनाइयों के लिए खुद को कैसे तैयार करें |

हम में से अधिकांश लोगो ने अपना जीवन एक आरामदायक दिनचर्या में निर्धारित किया हुआ है, हमारा दैनिक जीवन स्कूल, कॉलेज अथवा दफ्तर के चक्कर काटने में व्यतीत होता है| हम वीकेंड में बाहर जाते है, या शायद साल में एक बार छुट्टी लेते है| टीवी और मोबाइल पर तो हम घंटो समय बिताते हैं, मगर आत्म-विकास को बेहद कम समय देते है| इस बात पर गौर करिये की अगर, चंद मिनटों के लिए इंटरनेट बंद हो जाए तो हमारी जिंदिगी में उथल-पुथल हो जाता है| क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि हमारा जीवन कितना भौतिकवादी बन चुका है?

हम में से अधिकांश व्यक्तियों ने वास्तव में जीवन की चुनौतियों का सामना किया ही नहीं है| हम जीवन में सिर्फ आज़माइ और परखी हुइ योजनाओ को इस्तेमाल करते है ना की खुद के आराम-क्षेत्र से ऊपर उठ कर कुछ अलग करने की कोशिश करते है |

सबसे पहले तो ये समझना अनिवार्य है की, आराम मांगने में कुछ गलत नहीं है | हर इंसान शारीरिक और मानसिक रूप से कुछ हद तक आराम चाहता है| लेकिन जब हम आराम करने के आदि हो जाते है तब स्वयं के विकास को नज़रअंदाज़ कर देते है| जीवन में चुनौतियों का सामना करने से हम जान सकते है: क्या हम वास्तव में सक्षम है और क्या हम अनुभवों से अपने आप को समृद्ध करने के लिए तैयार है?

यहाँ कुछ बातें लिखी है जिनसे अपने आप को चुनौतियो के लिए तैयार किया जा सकता है:

1. याद रखें कि किसी ने कभी भी किताबी सूत्र को अपनाकर महान चीजें हासिल नहीं की हैं। जो लोग सार्थक जीवन जीते हैं वे अपने लक्ष्य का पीछा करने के लिए जोखिम लेने को तैयार रहते हैं ।

हमें चुनौतियो से बचने के बजाय उनका सामना करना चाहिए, वे हमें बढ़ने में मदद करेंगे (उदाहरण के लिए, यदि हम पैसा कमाना चाहते है तो अच्छे से अच्छी नौकरी ढूंढ सकते हैं या, जहा हैं उस वेतन में बढ़ोतरी की मांग कर सकते है, झटपट लोन ले लेना कोई समाधान नहीं है )

इससे यह मालूम होता है की, जीवन किसी के लिए भी हर समय आरामदायक नहीं हो सकता | यहां तक ​​कि प्राचीन काल से धरती पर सबसे महान और सबसे अमीर लोगों को भी कठिनाइयों और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। यह कभी-कभी अपनी इच्छा से और कभी-कभी परिस्थितियों के कारण मजबूर हो कर करना पड़ता है |

2. ‘मैं क्यों?’ यह सवाल उठाने के बजाय संघर्ष को स्वीकार करके, हम अपने जीवन पर नियंत्रण रख सकते हैं।

हम दुसरो को दोष देने के बजाय समाधान और संभावनाओं के बारे में सोचना शुरू कर सकते हैं। इसलिए, यदि हम किसी परीक्षा में असफल होते हैं, तो हम अपने आप से सवाल कर सकते हैं, की कैसे अच्छे नंबर लाये बजाए के शिक्षक को दोष देने के| विपत्ति का ही समय होता है जब हम ना की सिर्फ औरो का बल्कि अपने असली स्वभाव से भी रूबरू होते है| जीवन में जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो तब मनुष्य के लिए खुश और उदार रहना आसान होता है, पर याद रखे की प्रतिभाशाली व्यक्ति बनने क लिए हेमशा अग्नि परीक्षा से गुज़ारना पड़ता है|

अंत करते है लेस ब्राउन के एक उद्धरण को याद रखे :

’जीवन की चुनौतियों से निपटने की हमारी क्षमता हमारे चरित्र की ताकत का एक पैमाना है’

Article by: रोहित चोपड़ा

जिफकैर के संस्थापक सीईओ


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हम एक अनोखे व्यक्ति से मिलना ना भूलें

हमें याद रखना है की हमें एकांत में समय बिताना चाहिए

जाने दो और आगे बढ़ो

हमारे दिमाग और दिल पर जो भार है वो छोड़ देने में ही हमारी भलाई है