क्या हम अपने विचारों के गुलाम हैं ?

हमें अनियमित विचारों को हमारे व्यवहार और जीवन पर हावी नहीं होने देना चाहिए

अपने विचारों पर नियंत्रण करें | यह तय कर लें की आप क्या सोचेंगे और कहाँ पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे | आप अपने जीवन को उतना नियंत्रण में रख सकते हैं जितना आप अपने विचारों को काबू में रख सकते हैं |

अर्ल नाइटिंगेल

हम दिन में कितनी बार सोचते हैं की हम अपने मोबाइल फ़ोन नीचे रख कर कुछ उत्पादक काम करें, पर घंटों तक उसी मोबाइल पर समय व्यर्थ कर देते हैं ?

या

हम एक राजमार्ग पर तेज गति से गाडी चला रहे हैं और हमारे साथी हम से पूछते हैं की हम क्या सोच रहे हैं | हम कहते हैं 'कुछ नहीं' | यह कहने का एक कारण है की हमारे विचार हर दिशा में दौड़ रहे हैं और हम खुद नहीं जानते की हम आखिर सोच क्या रहे हैं |

दरसल हम अपने विचारों के ग़ुलाम बन चुके हैं | यह एक कड़वा सच है जो शायद हम स्वीकार ना कर पाएं |

कई बार, विचारों का एक सिलसिला हमारे मन में शुरू हो जाता है | जिस क्षण हम सीख लेते हैं की इन विचारों पर काबू कैसे पाना है, उसी क्षण से हमारे कर्म, हमारा व्यवहार और हमारा पूरा जीवन मुक्त हो जाते हैं | हमारे विचार हमारे काबू में होने चाहिए | अपने मन को अपने बस में करना अपने आप को सशक्त बनाना है |

यहाँ पर कुछ सरल उपाय हैं जिससे हम अपने विचारों को नियंत्रित कर सकते हैं :

1. वहीँ रुक जाएँ

जब भी हमें एहसास हो की हम बिना किसी वजह के सोचे जा रहे हैं , हम अपने विचारों को एक विराम दे सकते हैं | शुरुआत में ये थोड़ा कठिन होगा | ये विचार ज़्यादातर हमारी सामान्य ज़िन्दगी से जुड़े हुए होते हैं या फिर हम जो टेलीविजन, रेडियो, मोबाइल, आदि पर देखते या सुनते हैं,उनसे जुड़े हुए होते हैं | इस सब के कारण हम दुखी, गुस्सैल, उत्तेजित वगैरह महसूस करते हैं | हमें इन पुराने बासी विचारों को बार-बार अपने मन पर हावी होने देने की आदत को छोड़ देना चाहिए और अपनी सोच के प्रति जागरूक रहना चाहिए |

2.अपने आप से सवाल करें

आइये, हम अपने आप से पूछते हैं की हम क्या सोच रहे हैं ? क्या हम काम के बारे में सोच रहे हैं , या अपनी निजी ज़िन्दगी के बारे में या क्या हम फेसबुक पर देखि हुई वीडियो से जागरूक हुई भूख का शिकार हैं ?

हम इसे एक अलग ढंग से भी कर सकते हैं | सबसे पहले हम ये समझने की कोशिश करेंगे की हम क्या महसूस कर रहे हैं और उसके बाद हम समझने की कोशिश करेंगे की ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से हम इस तरह सोच रहे हैं |

3. पूछें 'क्यों' ?

यह पहचानने के बाद की हम क्या सोच रहे हैं, हम याद कर सकते हैं की क्या इससे जुड़ा हुआ हमारा कोई अनुभव है ? हमें हमेशा याद रखना चाहिए की हमारा वह विचार कैसा भी हो, हमें अपने मन को स्थिर रखना चाहिए और ना की उनके अनुसार नाचना चाहिए |

4. निर्णय करें की क्या ये विचार अवय्श्यक हैं ?

अब हमें सच्चे दिल से निर्णय करना होगा, की इस विचार का या इन विचारों का कोई महत्व है ? क्या ये विचार हमारी मदद कर रहे हैं या हमें बेबस बना रहे हैं ?

5. नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचार में बदलें

एक बार हमें बस यह एहसास हो जाए की हमारे विचार नकारात्मक या बेबस हैं, तो फिर हम इन्हे ऐसे विचारों में बदलने की कोशिश करें जो हमें ऊर्जा और ख़ुशी दें | ऐसा करने में हमें शुरुआत में थोड़ समय लग सकता है, लेकिन ये एक ऐसी कला है जो जीवन भर हमारा साथ देगी और हमें आगे ले जाएगी |

धन्यवाद |

Article by: विश्वा जानी

कवी और लेखक


Comments

Anil Shinde
Thanks madam

लक्ष्य लिखने की अपार शक्ति

यह सुनिश्चित कैसे करें की हमारा मन हमारे लक्ष्यों को लक्ष्य के रूप में माने न कि इच्छाधारी सोच के रूप में