हम अपना जीवन खुद चुनते हैं

POWER OF POSITIVE THINKING IN HINDI

विपाशा नायक

मेन्टल हेल्थ एम्बेसडर

कुछ दिनों पहले, मैंने अपनी एक पुरानी किताब में इस घटना के बारे में पढ़ा। यह टॉम नामक एक व्यक्ति के बारे में है, जो बेहद सकारात्मक है।

घटना कुछ इस तरह है :

टॉम एक ऐसा व्यक्ति था जिससे नफरत करने में आनंद आये। वह हमेशा अच्छे मूड में रहता था और हमेशा कुछ सकारात्मक कहना चाहता था। जब कोई उससे उस का हाल पूछता तो वह जवाब देता है, “अगर मैं इससे ज़्यादा बेहतर होता, तो मैं जुड़वाँ होता! जीवन इससे बेहतर हो ही नही सकता है! ”

वह एक अनोखा मैनेजर था क्योंकि कई वेटर थे जो उसके पीछे-पीछे रेस्तरां से लेकर रेस्तरां तक ​​जाते थे। वेटर्स का टॉम का अनुसरण करने का कारण उसका खुशमिजाज स्वभाव

था। वह एक कुदरती परेरक था। यदि किसी कर्मचारी का दिन खराब गया हो, तो टॉम उस कर्मचारी को स्थिति का उजला पहलु दिखाता था।

यह देखकर, उसके एक साथी को उत्सुकता हुई , इसलिए एक दिन वह टॉम के पास गया और उससे पूछा, “मुझे यह समझ नहीं आ रहा! कोई भी व्यक्ति हर समय सकारात्मक नहीं रह सकता है। आप यह

कैसे करते हो?"

टॉम ने कहा, "प्रत्येक सुबह जब मैं उठता हूं तो अपने आप से कहता हूं, टॉम, तुम्हारे पास आज दो विकल्प हैं। तुम अच्छे मूड में होना चुन सकते हैं या बुरे मूड में होना चुन सकते हैं। मैं अच्छे मूड में रहना चाहता हूं। जब भी कुछ बुरा होता है, मैं शिकार होना चुन सकता हूं या मैं इससे सीखना चुन सकता हूं। जब भी कोई मेरे पास शिकायत करने आता है, मैं उनकी शिकायतों को स्वीकार कर सकता हूं, या मैं जीवन के सकारात्मक पक्ष को इंगित कर सकता हूं। मैं जीवन का सकारात्मक पक्ष चुनता हूं।

"हाँ, लेकिन यह इतना आसान नहीं है," सहकर्मी ने कहा।

"हाँ, यह है" टॉम ने कहा। “जीवन विकल्पों से भरपूर है। हर स्थिति एक विकल्प है। आप चुनते हैं कि स्थितियों पर कैसे प्रतिक्रिया दी जाए। आप चुनते हैं कि लोग आपके मूड को कैसे प्रभावित करेंगे। आप अच्छे या बुरे मूड में होना चुनते हैं। सार यह है

की "यह आपकी पसंद है कि आप जीवन कैसे जीते हैं।"

टॉम ने जो कहा, उस पर सहयोगी ने विचार किया। इसके कुछ समय बाद, उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए रेस्तरां उद्योग छोड़ दिया। टॉम के साथ उनका संपर्क खो गया, लेकिन वह अक्सर उसके बारे में सोचते थे जब उसने प्रतिक्रिया करने के बजाय जीवन के बारे में एक विकल्प बनाया।

कई साल बाद, उन्होंने सुना कि टॉम ने कुछ ऐसा किया जो रेस्तरां व्यवसाय में कभी नहीं करना चाहिए: टॉम ने

एक सुबह पिछला दरवाजा खुला छोड़ दिया जिसकी वजह से तीन सशस्त्र लुटेरों घुस आये और बंदूक दिखा कर टॉम को डराया।

तिजोरी खोलने की कोशिश करते हुए, घबराहट के कारण टॉम का हाथ संयोजन से फिसल गया। लुटेरे घबरा गए और उसे गोली मार दी। सौभाग्य से, टॉम अपेक्षाकृत जल्दी पाया गया और स्थानीय आघात केंद्र में उसे ले जाया गया। 18 घंटे की सर्जरी और हफ्तों की गहन देखभाल के बाद, टॉम को अस्पताल से छोड़ा गया। उस के शरीर में अभी भी गोलियों के टुकड़े थे।

उन्होंने

दुर्घटना के लगभग ६

महीने बाद टॉम को देखा। जब उन्होंने उससे पूछा कि वह कैसा है, तो उसने जवाब दिया, "अगर मैं और बेहतर होता, तो मैं जुड़वाँ होता। मेरे घाव के निशान देखना चाहते हो?"

उन्होंने घावों को देखने से तो इनकार कर दिया, लेकिन उससे पूछा कि डकैती के वक़्त उसके दिमाग में क्या चल रहा था। "पहली बात जो मेरे दिमाग में आयी

वह यह थी कि मुझे पिछले दरवाजे को याद से बंद करना चाहिए था," टॉम ने जवाब दिया, "फिर, जैसे ही मैं फर्श पर लेटा, मुझे याद आया कि मेरे पास दो विकल्प है : मैं जीने का विकल्प चुन सकता था, या मरने का। और मैंने जीना पसंद किया। ”

“क्या तुम्हे डर नहीं लग रहा था? क्या तुमने ने होश खो दिया? " उसने पूछा। टॉम ने कहा, “डॉक्टर महान थे। वे मुझे बताते रहे कि मैं ज़रूर ठीक हो जाऊंगा।

लेकिन जब उन्होंने मुझे आपातकालीन कक्ष में घूमाया और मैंने डॉक्टरों और नर्सों के चेहरे के

भाव देखे, तो मैं वास्तव में डर गया। उनकी नज़र में, मैंने पढ़ा, 'यह एक मरा हुआ आदमी है', मुझे पता चला की अब मुझे कुछ करना होगा।"

"तुमने क्या किया?" उसने पूछा।

"वहाँ एक बडी

सी नर्स चिल्लाते हुए मुझे सवाल कर रही था," टॉम ने कहा। उसने पूछा कि क्या मुझे किसी चीज से एलर्जी है। 'हां, मैंने जवाब दिया'। डॉक्टरों और नर्सों ने मेरे जवाब का इंतजार करते हुए काम करना बंद कर दिया। मैंने एक गहरी साँस ली और चिल्लाया, 'मुझे बुलेट से एलर्जी है!" ’उनकी हँसी पर, मैंने उनसे कहा,“ मैं जीना चुन रहा हूँ। मुझ पर सर्जरी ऐसे करना जैसे कि मैं जीवित हूं, मरा नहीं। "

टॉम की जान बच गयी। अवश्य अपने डॉक्टरों के कौशल के कारण, लेकिन काफी हद तक टॉम के अद्भुत रवैये के कारण भी।

यह छोटी सी कहानी हमें याद दिलाती है की हमारे पास हमेशा एक विकल्प है। हमारी प्रतिक्रिया चुनने का विकल्प। चाहे जो कुछ भी हो, सकारात्मकता और कृतज्ञता हमारी ज़िन्दगी में

सहजता से खुश लाती है। आखिर सब कुछ, हमारा एटीट्यूड है।

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