क्वॉरेंटाइन

QUARANTINE

विपाशा नायक

मेन्टल हेल्थ एम्बेसडर

क्वॉरेंटाइन वह शब्द जो आजकल हर व्यक्ति की जुबां पर है। सच कहूं तो मैंने अब तक इस शब्द के बारे में कभी नहीं सुना था। क्वॉरेंटाइन का मतलब है खुद को दूसरे लोगों और समाज से अलग रखना। एक बहिर्मुखी होने की वजह से मैं खुद को 1 दिन से अधिक के लिए अलग किए जाने की कल्पना भी नहीं कर सकती थी । जब 21 दिन लॉक डाउन की घोषणा की गई तो मैं बुरी तरह से डर गई । पूरी दुनिया एक पल के लिए मानव पलट गई हो । सारी योजनाएं और समय सीमऎ ऐसे ही हवा हो गई। हम में से कई लोगों ने ऐसा ही महसूस किया होगा । निराश और दुखी होने के कुछ समय बाद मुझे एहसास हुआ यह चीजें कितनी अप्रत्याशित और असंगत थी । मुझे एकदम से पता चला कि हम मनुष्य इतने महत्वपूर्ण भी नहीं है जितना हम सोचते हैं । इसलिए इस परिस्थिति से निपटने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम व्यर्थ विचार करना छोड़ दें और कुदरत पर भरोसा रखें ।

लॉक डाउन को शुरू हुए 2 सप्ताह से अधिक समय हो गया है और मुझे अब तक दुखी होने का एहसास नहीं हुआ । इसके विपरीत मैंने इसे पसंद करना शुरू कर दिया है । क्वॉरेंटाइन के बहुत सारे सकारात्मक पहलू है जो मुझे पिछले 10 दिनों में नजर आने लगे हैं ।

इतनी लंबी अवधि के लिए हमें अपने जीवन मैं कभी भी अकेले खुद के साथ रहने का मौका ही नहीं मिला है और एक बदलाव के लिए यह अच्छा लगता है । बिना लोगों से गिरे हुए, बिना काम की चिंता किए, बस अपने साथ होना। यह एकांत हमें अपने लक्ष्यों को आत्मसात करने का मौका देता है । यह हमें अपने बारे में और अधिक जानने में सक्षम बनाता है । और सबसे अच्छी बात तो यह है कि इससे हमें खुद को बेहतर बनाने का मौका मिलता हैं । आप 21/90 नियम से तो परिचित होंगे ही । यह कहता है की एक नई आदत बनाने में 21 दिन लगते हैं और एक जीवन शैली बनाने में 90 दिन लगते हैं । क्योंकि हम 21 दिनों तक लॉक डाउन में है इसलिए नहीं आदत बनाने के लिए इससे बेहतर समय और क्या हो सकता है । इसके अलावा कुछ नया भी सीखा जा सकता है जैसे कि संगीत, कोई नई भाषा, खाना पकाना, चित्रकला ,या अपने कौशल को बढ़ाने की कोई और कला । एकांत में सृजनात्मकता की भरपूर खिलवट होती है ।

खुद के साथ समय बिताने के साथ साथ हमें अपने परिवार के साथ समय बिताने का अधिकतम लाभ मिल रहा है । आजकल हम सभी अपने अपने जीवन में व्यस्त रहते हैं और दिन के अंत में अपने परिवार के सदस्यों के साथ गुणवत्ता समय बिताना मुश्किल हो गया है । यह हमारे परिवार के साथ बातें करने का और हंसने का, खेल खेलने का, फिल्में देखने का, पुरानी फोटो एल्बम को फिर से देखने का और अगले साल की छुट्टियों की योजना करने का सबसे अच्छा समय है । मैंने यह एहसास किया है कि यह अवधि न केवल हमारे परिवार के करीब जाने में हमारी मदद कर रही हैं बल्कि हमारे उन दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी जो हमसे दूर है । हमने आमतौर पर जो करते थे उससे कहीं ज्यादा बार बातें करना और वीडियो कॉल करना शुरू कर दिया है । हम उन लोगों से भी जुड़ रहे हैं जिनके साथ हमारा संपर्क टूट गया था । इन दूरियों की वजह से हम अपने रिश्तो की और भी ज्यादा कीमत करने लगे हैं ।

सहजता और सुकून का अनुभव भी है । हम व्यस्त कार्यक्रमों की चिंता किए बिना कुछ अतिरिक्त घंटे सो रहे हैं । याद कीजिए उन अर्ली मॉर्निंग अलार्म को जो हमें घबराहट सी देते थे । घर पर रहने के कारण हमने नियमित रूप से घर का खाना लेना शुरू कर दिया । क्या आनंद है दोपहर को रोटी सब्जी दाल और चावल खाकर, बढ़िया सी नींद लेने का । डर लगता है कहीं लॉक डाउन के बाद मैं मोटी ना हो जा ।

इन दिनों सबसे संतोषजनक ट्रेंड है, वर्क फ्रॉम होम। मैंने आज तक कभी भी टेक्नोलॉजी के ऐसे इष्टतम उपयोग का अनुभव नहीं किया । जून,गूगल मीट और अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और लोगों ने इसके माध्यम से काफी कुशलता से काम

करना और सीखना शुरू कर दिया है । मेरी ऑनलाइन साइकोलॉजी क्लास में उपस्थिति इन दिनों लगभग पूरी हो रही है, जो यूनिवर्सिटी में हमारे नियमित व्याख्यान में कभी नहीं हुआ । और यह वर्क फ्रॉम होम का ट्रेंड अस्थाई नहीं लगता, यह निश्चित रूप से व्यापार जगत के लिए भी आगामी है।

क्योंकि लोग ज्यादातर बाहर नहीं निकल रहे, इसलिए सड़कों पर वाहनों का परेशान करने वाला शोर कम होता है और उनकी जगह प्रकृति की शांति पूर्वक ध्वनियां सुनाई देने लगी है । खुद को ठीक करने के लिए प्रकृति को बहुत जरूरी थान और समय मिल गया है । प्रकृति ने निश्चित रूप से इसके लिए कामना की होगी । वह हमारी गति कम करना चाहती थी वह चाहती थी कि हम घरों के अंदर रहकर बिना किसी अतिरिक्त प्रदूषण के उसे कुछ समय आराम दे ।

वैश्विक महामारी की वजह से हमारा पूरा विश्व जैसे एकजुट हो गया है । हम किसी सामान्य मुद्दे के लिए एक दूसरे से नहीं लड़ रहे । हर कोई दूसरे इंसानों और दुनिया के प्रति कितना दयालु हो गया है । मैं जनता कर्फ्यू दिवस पर ताली बजाने की 10 मिनट कभी नहीं भूल पाऊंगी । एकता कि वह भावना अभूतपूर्व थी।

हवा में जैसे प्रेम, कृतज्ञता और सकारात्मकता लहरा रही थी । मैं आशा और प्रार्थना करती हूं यह सारी दुनिया ऐसे ही एकजुट रहे और सामूहिक रूप से प्रगति करती रहे।

View more content by विपाशा नायक

Discussion Board

आपने अपना लॉकडाउन कैसे बिताया?